मां, मुझे कुछ महीनों के लिए विदेश जाना पड़ रहा है। तुम्हारे रहने का इंतजार मैंने करा दिया है । '33 वर्षीय अविवाहित डॉक्टर प्रदीप ने देर रात घर में घुसते ही मां से कहा।
' बेटा तेरा विदेश जाना जरूरी है क्या? मां की आवाज में चिंता और घबराहट झलक रही थी। 'मां' कुछ ही महीने की तो बात है। प्रदीप ने कहा। जैसी तेरी इच्छा' रुंधी हुई आवाज में मां बोली। और छोड़ आया प्रदीप अपनी मां 'ममता' को पड़ोस वाले शहर में स्थित एक वृद्धाश्रम में ।
वृघ्दाश्रम में छह माह गुजर जाने के बाद एक दिन ममता देवी ने आश्रम के संचालक जय राम जी के ऑफिस में फोन से बेटे के मोबाइल पर फोन किया और कहा प्रदीप तुम हिंदुस्तान आ गए हो या जर्मनी में ही हो? मां अभी मैं जर्मनी में ही हूं? प्रदीप का सवाल था तीन-तीन चार-चार माह के अंतराल पर ममता देवी प्रदीप को फोन कर दी तो उसका एक ही सवाल जवाब मिलता मैं अभी वहीं हूं जैसे ही भारत लौटे आपको सूचना कर दूंगा ?
इस तरह लगातार 2 साल से ज्यादा गुजर गए ? अब तो वृद्ध आश्रम में लोग भी कहने लग गए देखो ऐसा चला बेटा निकला तो कैसे अपनी मां को यहां छोड़ गया ?
आश्रम के ही किसी बुजुर्ग ने कहा मुझे तो लगता नहीं कि डॉक्टर विदेश गया होगा वह तो बूढ़ी मां से छुटकारा पाना चाह रहा होगा ।"
3 साल तक आश्रम में रहने के बाद अब ममता देवी को भी अपनी नियति का पता चल गया बेटे का गम उन्हें अंदर ही अंदर तोड़ने लगा । 1 साल आश्रम में और रहने के बाद एक दिन उनकी भी मौत हो गई।
उनकी मौत पर आश्रम के लोगों ने आश्रम के संचालक से कहा कि इनकी मौत की खबर उनके बेटे को तो दे दो हम तो हमें तो लगता नहीं की वह विदेश में होगा वह होगा ही यही अपने देश में उनके बेटे को मैं कैसे खबर करो उनको मरना मरे तो 3 साल हो गए। संचालक की बात सुनकर वे वहां पर उपस्थित हर व्यक्ति हतप्रभ रह गया । उनमें से एक वृद्ध बोले कि अगर डॉक्टर को गुजर 3 साल हो गए तो ममता देवी से मोबाइल पर कौन बात करता था वह मोबाइल तो मेरे पास है जिसमें उनके बेटे की रिकॉर्डिंग आवाज है संचालक बोला पर ऐसा क्यों तब संचालक जी बोले 4 साल पहले जब प्रदीप अपनी मां को यहां छोड़ने आया तो उनके ने बताया कि उसे ब्लड कैंसर है और डॉक्टर होने के नाते में यह अच्छी तरह जानता हूं कि इस कैंसर की आखिरी स्टेज पर मुझे बहुत तकलीफ होगी वह तो यह देख कर जीते ही मर जाएगी मुझे तो मरना ही है पर मैं यह नहीं चाहता कि मेरे कारण मेरी मेरे से पहले मेरी मां भरे संचालक जी की यह दास्तां सुनकर वहां पर उपस्थित लोगों की आंखों छलछला गई ममता देवी का अंतिम संस्कार आश्रम के ही एक हिस्से में कर दिया गया ?
' बेटा तेरा विदेश जाना जरूरी है क्या? मां की आवाज में चिंता और घबराहट झलक रही थी। 'मां' कुछ ही महीने की तो बात है। प्रदीप ने कहा। जैसी तेरी इच्छा' रुंधी हुई आवाज में मां बोली। और छोड़ आया प्रदीप अपनी मां 'ममता' को पड़ोस वाले शहर में स्थित एक वृद्धाश्रम में ।
वृघ्दाश्रम में छह माह गुजर जाने के बाद एक दिन ममता देवी ने आश्रम के संचालक जय राम जी के ऑफिस में फोन से बेटे के मोबाइल पर फोन किया और कहा प्रदीप तुम हिंदुस्तान आ गए हो या जर्मनी में ही हो? मां अभी मैं जर्मनी में ही हूं? प्रदीप का सवाल था तीन-तीन चार-चार माह के अंतराल पर ममता देवी प्रदीप को फोन कर दी तो उसका एक ही सवाल जवाब मिलता मैं अभी वहीं हूं जैसे ही भारत लौटे आपको सूचना कर दूंगा ?
इस तरह लगातार 2 साल से ज्यादा गुजर गए ? अब तो वृद्ध आश्रम में लोग भी कहने लग गए देखो ऐसा चला बेटा निकला तो कैसे अपनी मां को यहां छोड़ गया ?
आश्रम के ही किसी बुजुर्ग ने कहा मुझे तो लगता नहीं कि डॉक्टर विदेश गया होगा वह तो बूढ़ी मां से छुटकारा पाना चाह रहा होगा ।"
3 साल तक आश्रम में रहने के बाद अब ममता देवी को भी अपनी नियति का पता चल गया बेटे का गम उन्हें अंदर ही अंदर तोड़ने लगा । 1 साल आश्रम में और रहने के बाद एक दिन उनकी भी मौत हो गई।
उनकी मौत पर आश्रम के लोगों ने आश्रम के संचालक से कहा कि इनकी मौत की खबर उनके बेटे को तो दे दो हम तो हमें तो लगता नहीं की वह विदेश में होगा वह होगा ही यही अपने देश में उनके बेटे को मैं कैसे खबर करो उनको मरना मरे तो 3 साल हो गए। संचालक की बात सुनकर वे वहां पर उपस्थित हर व्यक्ति हतप्रभ रह गया । उनमें से एक वृद्ध बोले कि अगर डॉक्टर को गुजर 3 साल हो गए तो ममता देवी से मोबाइल पर कौन बात करता था वह मोबाइल तो मेरे पास है जिसमें उनके बेटे की रिकॉर्डिंग आवाज है संचालक बोला पर ऐसा क्यों तब संचालक जी बोले 4 साल पहले जब प्रदीप अपनी मां को यहां छोड़ने आया तो उनके ने बताया कि उसे ब्लड कैंसर है और डॉक्टर होने के नाते में यह अच्छी तरह जानता हूं कि इस कैंसर की आखिरी स्टेज पर मुझे बहुत तकलीफ होगी वह तो यह देख कर जीते ही मर जाएगी मुझे तो मरना ही है पर मैं यह नहीं चाहता कि मेरे कारण मेरी मेरे से पहले मेरी मां भरे संचालक जी की यह दास्तां सुनकर वहां पर उपस्थित लोगों की आंखों छलछला गई ममता देवी का अंतिम संस्कार आश्रम के ही एक हिस्से में कर दिया गया ?
धन्यवाद


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